Category Archives: Hindi Rankaar * हिन्दी रणकार

सोचा भी है कि क्या सोचना है?

संजय वि. शाह नाक और दिमाग में कुछ कमाल की साम्यताएं है. दोनों बहूत ही महत्त्वपूर्ण अंग है लेकिन दोनों को मेनेज करने को न्यूनतम कष्ट उठाना पडता है. जागते रहो या सो जाओ, नाक सांसे लेते ही रहेगा. चाहो या ना चाहो, दिमाग कुछ ना कुछ सोचते ही रहेगा. सोचने में दिमाग का आखिर [...]

जीवन सार्थक और संपूर्ण होगा! (Hindi Rankaar)

रणकार संजय वि. शाह नदी कभी अपना पानी पीती नहि है. ना कभी कोई वृक्ष अपने ही उगाए फल खाता है. बारिश जो दाने उगाती है उसे कभी मांगती नहि. ये सब वो दानवीर है जो सिर्फ देना जानते है और बदले में कुछ पाने की आशा रखते नहि है. सच्चे धनवान भी वो ही [...]

बुद्धि का प्रयोग

रणकार ऐसा माना जाता है कि बुद्धि का प्रयोग करने से हर समस्या का निवारण मिल जाता है, मिल सकता है. पर ये बात शत प्रतिशत सच नहि है. कभी कभी ऐसा भी होता है कि बुद्धि का प्रयोग करने से समस्या का निवारण नहि भी मिल पाता है. मान लिजिए कि ट्रॅन में आप [...]

विरोधाभास

रणकार कैसा विरोधाभास प्रवर्तमान है ईस जगत में! कम्प्युटर के लिये जो चाहिए वो सीडी़ की कीमत सिर्फ दस रूपये. रॅस्टॉरां में जो मिलता है वो ज्युस का एक ग्लास चालीस रूपये का! महंगाई ने टॅक्नॉलोजी को बेहद सस्ता कर दिया है और एक वक्त के खाने को आश्चर्यचकित कर दे उतना महंगा. आम आदमी [...]

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